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इच्छा

ये सूनापन कैसे भरूँ
कैसे भरूँ वो सूखी हुई सरिता
ताकि सागर सूख न जाये
कैसे भरूँ वो खाली कोना दिल का
कैसे भरूँ वो टूटे हुये संबंध
जो शुरू होने से पहले खत्म हो गये।

कैसे रोकूँ वो शजरों का कटना
ताकि फिजाँ सहरा न बन जाये
कैसे रोकूँ तूफान का बहना
ताकि चरागे-इश्क बुझ न जाये
कैसे रोकूँ उन्हें जो चले जा रहे
ताकि ये मंजर मुनव्वर रहे।

ऐ खुदा, सुन ले ये इल्तजा
भर दो ये सुनापन, ये टूटे हुये संबंध,
रोक दो ये बहना तूफान का
ताकि जहनो-दिल रौशन रहे
ताकि जब आये प्यास, तो सरिता नजदीक रहे
ताकि जब दर्शन की इच्छा हो,
तो आईना पहलू में रहे।

Published in Poetry

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