आकाश के पँक्षी को देखो
वे
न बोते हैँ
न बुनते हैँ
और
न घोसलों में
जमा करते हैं
फिर भी
ईश्वर उन्हें खिलाता है।

जीवन क्या
भोजन से बढकर नहीं है?

सारी धरती तुम्हारी है
फिर
उसपे रहनेवालों में
भेद क्यों?