मैं नहीं जानता कौन है वो,
जिसके लिये मेरीं धडकनें धडक रही हैं
साँसें लेता हूँ मैं जिनके लिये,
जी रहा हूँ मैं किसके लिये,
मैं नहीं जानता कौन है वो।

सपने देखता हूँ मैं हर रोज,
पर वो मेरे स्वप्नों में नहीं आते,
उनके आगमन के लिये सदियों से तरसा रहा हूँ मैं,
जो मेरे दिल में प्यार की कलियाँ खिला दें।
यह चाँद जिसकी मधुरिमा,
पूरे सँसार में प्यार की किरणें बिखेरती हैं
सारे टूटे हुये दिलों में,
प्यार के रस घोल देतीं हैं,
मैं सोचता रहा हूँ हमेशा,
कि क्या मेरे दिल में बसी खामोशियों को
कभी कोई मीठी सी आवाज मिलेगी
सारे जहाँ से ठुकराये हुये इस दिल में
क्या कभी मिठास भरेगा?

कितना प्यार है चाँद को चाँदनी से,
सुबह को ओस से, पर्वत को झरने से,
कलियों कि खुशबू से, तितलियों को फूलों से,
रात्रि को सन्नाटे से, दिन को उजाले से,
सागर को लहरों से, नयनों को सपनों से,
क्या ऎसा प्रेम मेरे जीवन में आयेगा
और इस जीवन में फिर से जीने की चाहत बढायेगा?

यह अँधेरे की चादर जो,
मेरे जीवन के स्वप्न पर छाते जा रही है।
मैं गुमनाम चेहरों में
खामोश होकर पहचान माँग रहा हूँ,
मेरे स्वप्न बादलों के महल में खोते जा रहे हैं,
ओस सी शीतल और कोमल मेरे भावों को,
सुबह की किरणें कुचलती जा रहीं हैं।
सत्य से अटल मेरे प्रेम के लिए,
इस झूठी दुनिया में कोई जगह नहीं,
मगर यह दिल अभी भी इंतजार कर रहा है।

केंचुए सा सुप्त मेरा प्रेम,
इसे काट कर कितने भी टुकडे कर दो,
मरेगी नहीं,
हर टुकडा केंचुए सा,
जिन्दगी की साँस बनकर,
मेरे आँखों की प्यास लेकर,
पुनः विस्तृत हो जायेगा।

क्योंकि,
मैं अभी भी आशा में हूँ उसके,
मुझे अभी भी इंतजार है उसका,
पर ये भी एक सच है कि
मैं अब भी ये नहीं जानता,
कौन है वो?