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अनुभव

कुछ सपने हैं, कुछ इरादे हैं,
कुछ चाहत है, कुछ वादे हैं।

कई सपने थे, जो चकनाचूर कर दिये गए
कई इरादे थे, जिनपर पानी फेर दिये गए
कई चाहत थे, चाहनेवाले ही छिड गए
कई वादे थे, जो अपनों के द्वारा ही तोडे गये।

कहते थे कि यहाँ ठँढी हवा बहती है
मैं गुजरा तो तूफान से सामना हुआ,
कहते थे कि यहाँ प्रेम की बारिश होती है
मौसम खराब हो गई है, अब यहाँ ओले बरसते हैं।

मैंने सुना था कि सबलोग यहाँ सीधे-सादे हैं
ऐसा क्यूँ लगता है कि सच्चाई का बोझ खुद पर लादे हैं,
मैंने पूछा कि आधे-अधूरे जीवन से क्या फायदा
आवाज आई के हम क्या करें, हम तो बस प्यादे हैं।

मल्हार की घडियों में जलधार कब आते हैं
सावन के मौसम में घर-बार भूल जाते हैं,
जीने वालों के अधिकार छिनते नजर आये
मौत से लडने वाले जिन्दगी से ही हार जाते हैं।

अब कहते हो कि वापस मुड जाओ
धरती पर रेंगते कीडों के कारवाँ में तुम भी जुड जाओ,
पर जीने वालों को कौन रोक सकेगा
वे तो फैलेंगे ही, भले ही सारा संसार सिकुड जाये।

अब सपने हैं आसमान को छेदने की, पत्थर मिले या न मिले
लहरों को चीरने की इरादें हैं, माँझी की परवाह कौन करे
खुशियों की बारिश करने की चाहत है, देखता हूँ कब तक आँसू बरसाओगे
अब मेरे वादे हीरों से मजबूत लगते हैं, तोडने वाले खुद ही टूट जायेंगे।

हम तो इंतजार करेंगे कयामत के बाद भी
जीने वाले जिन्दगी की परवाह कब करते हैं,
हम बिखर गये तो जमाना कौन बुहारेगा
अब मेरे आशियाँ में फजाओं के दरवाजे हैं।

क्योंकि, कुछ सपने हैं, कुछ इरादे हैं,
फिर, कुछ चाहत हैं, कुछ वादे हैं।

Published in Poetry

One Comment

  1. shows the zest and the spirit in you….the best trait in you that I like….keep that always…that makes u …..abhishek….jeet ka teeka

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