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मेरा कोई नहीं

अपने दिल का हाल मैं किसे सुनाऊँ, मेरा कोई नहीं
हाल दुःखों का किसे बताऊँ, मेरा कोई नहीं।
मेरा दिल टुटा तो क्या हुआ, कितने दिल यहाँ टूटे होंगे,
साथ सब छोडें तो गम हो क्यों, कितने प्यार यहाँ लूटे होंगे,
तू दर्द मेरा समझेगा कैसे, मेरे लिये तू तडपेगा कैसे,
मेरी आवाज तू कैसे पहचाने, मेरा कोई नहीं।

जीवन का सफर तय करना है खुद ही, साथी क्यों ढूँढते फिरूँ,
रात को आना ही है, आएगा, दिन की बाट क्यों जोहते फिरूँ,
सूरज भी तो बढता अकेला, नदियाँ राह खोजती हैं खुद ही,
मेरा साथ कोई देगा क्यों, साथ किसी ने कभी दिया है क्या,
साये भी साथ छोडें अँधेरों में, कोई दूसरा साथ कैसे रहेगा,
मेरे दिल तू क्यों न समझे, मेरा कोई नहीं।

Published in Poetry

One Comment

  1. tujhe sharm nahi aayi ye poem likhte huye…mujhe jeete ji maar daala tooone…mere hote huye bhi keh raha hai ki tera koi nahi…ye umeed na thi tujhse :((“

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