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धर्मकाँटा

 

राजा मेरा गज़ब का, किये थे अद्भुत काम
सागर लंका धाँस दी, पाप मिटाता नाम.

उस दिन तेरे देश भये सुखी सभी सुबः शाम
न्याय, सत्य, और प्रेम ने किये कुशल व्यायाम.

याद बिसारी तुने तब, जब पड़ी तेज है घाम
लेकर तेरा नाम यहाँ मच रखी घोर संग्राम.

नज़र बिराजे रामचन्द्र, अधर निहारे दाम
आयुध तानी फैज़ पे, और किया घोर बदनाम.

Published in Poetry

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