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Category: Poetry

Revolution

Resolution, resolution, resolution
But why didn’t we ever bring a revolution,
why we never look like intrepid.
We begin from an imbroglio,
waxed in and now we want be finished in imbroglio.

Are we unwilling to find a way?
No,
paths are ahead of us.
The sun never stopped shining,
but our eyes have been closed.
The freesom of sky is moving around
and we can fly to the stars.
But we don’t have courage to let ourselves
in the splendid,
perpetual unkown.
We don’t know the experience of joy
that the unknown brings,
the greatest ecstacy that is swimming around.

Haa, we are waiting
to be nailed by the time before the doors
Shall the time arrive
when we have to move along the time.
And yes, it is a time to
take a chance,
a charge, a control,
not taking care of the being.
taking the cares shall
let us to enter
in nowhere….

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सफर

जिन्दगी का सफर जब लंबा लगने लगे
पैरों के नीचे काँटों का बिस्तर चुभने लगे,
सूरज की किरणें जब अग्नि बरसाएँ
और रास्ते पर जब पत्थर नहीं पर्वत अडने लगे।

तब भी मुसाफिर हार नहीं मानना
क्योंकि रुकने का मतलब जीवन को रोकना है,
जिन्दगी तुझे हारने को नहीं दी गई
राही, तुझे मुस्कुराते हुये बस चलते ही जाना है।

इस सफर में सब तेरे सहयात्री हैं
पर तुझे इनसे कोई सरोकार नहीं,
तुम्हें इनके सहारे सफर नहीं तय करना है
और जिन्दगी कभी सहयात्रियों की मोहताज नहीं।

इनमें से कुछ तुम्हें भटकायेंगे
कुछ तुझे बातों मे अटकायेंगे,
कुछ तेरे सफर को आसान भी बनायेंगे
और जब तक जीवित रहें तेरा साथ निभायेंगे।

मँजिलें पहले बनाई जाती हैं
रास्ते बाद में मिलते जायेंगे,
जिन्दगी के सफर को तुझे खुद ही तय करना है
तो ये सहयात्री तुझे मँजिल तक कैसे पहुँचायेंगे।

तू सामने की दूरी से क्यों घबराता है
पीछे कितने मील के पत्थर छोड आया है तू,
जो बैठ गए उनकी बातों को क्यों सुनता है
मुडके देख, सुनकर कितनी बार पछताया है तू।

तुझे इस सफर में रूकना नहीं
बल्कि राह पर रोते हुओं कि हँसाना है,
और तुझे इस जिन्दगी को जीते हुए,
मुसाफिर बस चलते ही जाना है।

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मेरा कोई नहीं

अपने दिल का हाल मैं किसे सुनाऊँ, मेरा कोई नहीं
हाल दुःखों का किसे बताऊँ, मेरा कोई नहीं।
मेरा दिल टुटा तो क्या हुआ, कितने दिल यहाँ टूटे होंगे,
साथ सब छोडें तो गम हो क्यों, कितने प्यार यहाँ लूटे होंगे,
तू दर्द मेरा समझेगा कैसे, मेरे लिये तू तडपेगा कैसे,
मेरी आवाज तू कैसे पहचाने, मेरा कोई नहीं।

जीवन का सफर तय करना है खुद ही, साथी क्यों ढूँढते फिरूँ,
रात को आना ही है, आएगा, दिन की बाट क्यों जोहते फिरूँ,
सूरज भी तो बढता अकेला, नदियाँ राह खोजती हैं खुद ही,
मेरा साथ कोई देगा क्यों, साथ किसी ने कभी दिया है क्या,
साये भी साथ छोडें अँधेरों में, कोई दूसरा साथ कैसे रहेगा,
मेरे दिल तू क्यों न समझे, मेरा कोई नहीं।

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ख्वाब

रात्रि की चौथी पहर में,
एक ख्वाब देखा है मैनें।
जिन्दगी कि किताब में जैसे,
बुझता हुआ चिराग देखा है मैनें।
अँधेरों की बारात अपने शवाब पर थीं,
खुशियों के जनाजे का सौगात देखा है मैनें।
प्रियजनों से बिछाव का दुःख नहीं था मुझको,
दोस्तों को अब सामने से करते हुए घात देखा है मैनें।

आँखें खुलीं तो खबर मिला स्वप्न था सब,
जानकर खुशी हुई कि झूठा ख्वाब देखा है मैनें।
उमँग की किरणें सामने आलिंगन कर रहीं थीं,
चारों ओर से होते प्रेम का बरसात देखा है मैनें।
ख्वाब के बाहर रौशन है शहरे-मुहब्बत,
बीते हुये बातों का औकात देखा है मैनें।

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तुम्हारी याद

शहर से सहर तक
युगों की डगर तक
जीवन की सफर से,
दुखों की कहर तक
प्रिये,
मैनें नहीं भूली तुम्हारी याद
जबकि तुम थे बेखबर मुझसे
कदाचित् हम दूर नहीं थे तुझसे।

लेकिन प्रिये,
इस सुनहली रेत पर,
चमकती धूप में भी
नहीं आ रही तुम्हारी छाया भी।
अन्धेरे ख्वाबों में,
यादों के आईने में,
नहीं दिखती तुम्हारी काया भी।
अकेलेपन के सिलसिले खत्म नहीं होते,
बहते हुये आँसू अब जब्त नहीं होते,
मुझे नहीं है तुमसे कोई शिकायत।

किन्तु मेरे प्रिये,
मेरे जीवन की रोशनी,
हूँ मैं तुम्हारे साथ सदैव,
कंपकंपाते तुषारों के तले,
सागर किनारे शांत क्षितिज के नीचे,
रेतीली गर्म हवा में जलते हुये भी
जेठ की दुपहरी में,
पतझड के शजरों के तले।

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कौन है वो

मैं नहीं जानता कौन है वो,
जिसके लिये मेरीं धडकनें धडक रही हैं
साँसें लेता हूँ मैं जिनके लिये,
जी रहा हूँ मैं किसके लिये,
मैं नहीं जानता कौन है वो।

सपने देखता हूँ मैं हर रोज,
पर वो मेरे स्वप्नों में नहीं आते,
उनके आगमन के लिये सदियों से तरसा रहा हूँ मैं,
जो मेरे दिल में प्यार की कलियाँ खिला दें।
यह चाँद जिसकी मधुरिमा,
पूरे सँसार में प्यार की किरणें बिखेरती हैं
सारे टूटे हुये दिलों में,
प्यार के रस घोल देतीं हैं,
मैं सोचता रहा हूँ हमेशा,
कि क्या मेरे दिल में बसी खामोशियों को
कभी कोई मीठी सी आवाज मिलेगी
सारे जहाँ से ठुकराये हुये इस दिल में
क्या कभी मिठास भरेगा?

कितना प्यार है चाँद को चाँदनी से,
सुबह को ओस से, पर्वत को झरने से,
कलियों कि खुशबू से, तितलियों को फूलों से,
रात्रि को सन्नाटे से, दिन को उजाले से,
सागर को लहरों से, नयनों को सपनों से,
क्या ऎसा प्रेम मेरे जीवन में आयेगा
और इस जीवन में फिर से जीने की चाहत बढायेगा?

यह अँधेरे की चादर जो,
मेरे जीवन के स्वप्न पर छाते जा रही है।
मैं गुमनाम चेहरों में
खामोश होकर पहचान माँग रहा हूँ,
मेरे स्वप्न बादलों के महल में खोते जा रहे हैं,
ओस सी शीतल और कोमल मेरे भावों को,
सुबह की किरणें कुचलती जा रहीं हैं।
सत्य से अटल मेरे प्रेम के लिए,
इस झूठी दुनिया में कोई जगह नहीं,
मगर यह दिल अभी भी इंतजार कर रहा है।

केंचुए सा सुप्त मेरा प्रेम,
इसे काट कर कितने भी टुकडे कर दो,
मरेगी नहीं,
हर टुकडा केंचुए सा,
जिन्दगी की साँस बनकर,
मेरे आँखों की प्यास लेकर,
पुनः विस्तृत हो जायेगा।

क्योंकि,
मैं अभी भी आशा में हूँ उसके,
मुझे अभी भी इंतजार है उसका,
पर ये भी एक सच है कि
मैं अब भी ये नहीं जानता,
कौन है वो?

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इच्छा

ये सूनापन कैसे भरूँ
कैसे भरूँ वो सूखी हुई सरिता
ताकि सागर सूख न जाये
कैसे भरूँ वो खाली कोना दिल का
कैसे भरूँ वो टूटे हुये संबंध
जो शुरू होने से पहले खत्म हो गये।

कैसे रोकूँ वो शजरों का कटना
ताकि फिजाँ सहरा न बन जाये
कैसे रोकूँ तूफान का बहना
ताकि चरागे-इश्क बुझ न जाये
कैसे रोकूँ उन्हें जो चले जा रहे
ताकि ये मंजर मुनव्वर रहे।

ऐ खुदा, सुन ले ये इल्तजा
भर दो ये सुनापन, ये टूटे हुये संबंध,
रोक दो ये बहना तूफान का
ताकि जहनो-दिल रौशन रहे
ताकि जब आये प्यास, तो सरिता नजदीक रहे
ताकि जब दर्शन की इच्छा हो,
तो आईना पहलू में रहे।

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जीवन

आकाश के पँक्षी को देखो
वे
न बोते हैँ
न बुनते हैँ
और
न घोसलों में
जमा करते हैं
फिर भी
ईश्वर उन्हें खिलाता है।

जीवन क्या
भोजन से बढकर नहीं है?

सारी धरती तुम्हारी है
फिर
उसपे रहनेवालों में
भेद क्यों?

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विश्वास

किसी भीषण
सूखे से आक्राँत
बँजर जमीन के सद्रिश्य
चटखता जा रहा है
मेरा ह्रिदय

काश
तुम घटा बनकर
मेरे जीवन मेँ आती
और
इस शुष्क ह्रिदय मेँ
यह विश्वास
पुनः जगा पाती
कि
बसंत आज भी
निहित है मुझमें ।

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